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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 16 • श्लोक 11
स्मृतिसत्पुराणवाक्यैर्यथाश्रुतायां हरेर्मूर्तौ । मानसपूजाभ्यासो विजननिवासेऽपि तात्पर्यम् ॥
उस सूक्ष्म-भक्ति के लक्षण ये हैं - स्मृति और पुराणों के सद्वाक्यों से सुनी हुई भगवान्‌ की मूर्ति के मानस-पूजन का अभ्यास, एकान्त-सेवन में तत्पर रहना,
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