एवं कुर्वति भक्तिं कृष्णकथानुग्रहोत्पन्ना ।
समुदेति सूक्ष्मभक्तिर्यस्या हरिरन्तराविशति ॥
इस प्रकार स्थूल-भक्ति का अभ्यास करते-करते भगवत्कथा के अनुग्रह से सूक्ष्म-भक्ति का उदय होता है, जिसके भीतर भगवान् की उपलब्धि होती है।
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