उस परमानन्दरूप समुद्र में जो पुरुष बाहर-भीतर से पूर्ण होकर डूब गया है, उसकी दशा ऐसी होती है जैसे गंगाजी के महान् कुण्ड में चिरकाल से डूबा हुआ कोई कलश हो।
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