अपनी प्रचण्ड किरणों से देदीप्यमान अत्यन्त दीप्तिशाली चैतन्य-भास्कर के प्रकाश में ही सब ओर यह अनेक जीवरूप मृग-तृष्णा सर्वथा मिध्या ही प्रतीत हो रही है।
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