माधुर्यं गुडपिण्डे यत्तत्तस्यांशकेऽणुमात्रेऽपि ।
एवं न पृथग्भावो गुडत्वमधुरत्वयोरस्ति ॥
गुढ़ के पिण्ड में जो मधुरता होती है, वह उसके छोटे-से-छोटे कण में भी होती है, इस प्रकार गुडत्व और मधुरत्व में कोई भेद नहीं है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
प्रबोधसुधाकर के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
प्रबोधसुधाकर के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।