अद्वैतानन्द के उद्वेग से जब 'यह क्या है? मैं कौन हूँ! और किसका हूँ?' ऐसी जिज्ञासा से चित्त सुस्त पड़ जाता है तो (अन्त में) वह मूर्छित हो जाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
प्रबोधसुधाकर के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
प्रबोधसुधाकर के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।