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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 13 • श्लोक 6
परमानन्दानुभवात्सुचिरं नादानुसन्धानात् । श्रेष्ठश्चित्तलयोऽयं सत्स्वन्यलयेष्वनेकेषु ॥
यद्यपि लय के और भी अनेक उपाय हैं तथापि जो चित्तलय दीर्घ काल तक नादानुसन्धान करते हुए परमानन्द का अनुभव होने से प्राप्त होता है वह सर्वोत्तम है।
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