यदि कहो कि आत्मा के रहते हुए (नेत्रेन्द्रिय के अभाव में भी) अन्धे मनुष्य को पदार्थ का ज्ञान क्यों नहीं होता? सो उसे अन्य इन्द्रियों से ज्ञान होता ही है, क्योंकि अन्धे मनुष्य को नेत्र बन्द होने पर भी हाथ से छूकर पदार्थ का ज्ञान हो ही जाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
प्रबोधसुधाकर के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
प्रबोधसुधाकर के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।