तथा इनका भान भी चक्षुन्द्रिय द्वारा परमात्मा से ही होता है। अथवा यों कहो कि यदि नेत्रेन्द्रिय द्वारा आत्मा सहायक न होता तो केवल प्रकाश से ही इन पदार्थो का भी ज्ञान नहीं हो सकता था।
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