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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 12 • श्लोक 1
रविचन्द्रवह्निदीपप्रमुखाः स्वपरप्रकाशाः स्युः । यद्यपि तथाप्यमीभिः प्रकाश्यते क्वापि नैवात्मा ॥
यद्यपि सूर्य, चन्द्र, अग्नि और दीपक आदि अपने और पराये सबके प्रकाशक हैं, तथापि इनसे आत्मा कभी प्रकाशित नहीं होता।
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