मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
प्रबोधसुधाकर • अध्याय 10 • श्लोक 14
मानुषमतङ्गमहिषश्वसूकरादिष्वनुस्यूतम् । यः पश्यति जगदीशं स एव भुङ्क्तेऽद्वयानन्दम् ॥
जो पुरुष हाथी, भैंसे, कुत्ते और शूकर आदि में एक ही जगदीश्वर को व्याप्त देखता है, वही अद्वैतानन्द का भोग करता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
प्रबोधसुधाकर के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

प्रबोधसुधाकर के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें