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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 1 • श्लोक 9
मातृगुरूदरदर्यां कफमूत्रपुरीषपूर्णायाम् । जठराग्निज्वालाभिर्नवमासं पच्यते जन्तुः ॥
फिर नौ मास तक मल-मूत्र और कफादि से पूर्ण माता की कोखरूप बड़ी भारी कन्दरा में पड़ा हुआ यह जीब जठरानल की ज्वालाओं से जला करता है।
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