देहः किमात्मकोऽयं कः संबन्धोऽस्य वा विषयैः ।
एवं विचार्यमाणेऽहन्ताममते निवर्तेते ॥
"यह देह किससे बना है और इसका विषयों से क्या सम्बन्ध है" ऐसा विचार करते रहने से अहंता और ममता निवृत्त हो जाती हैं।
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