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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 1 • श्लोक 6
सा चाहंममताभ्यां प्रच्छन्ना सर्वदेहेषु । तत्राहन्ता देहे ममता भार्यादिविषयेषु ॥
वह वितृष्णता समस्त देहधारियों के भीतर अहंता और ममता से छिपी हुई है। उनमें से अहंता देह में होती है और ममता स्नी-धन आदि विषयों में हुआ करती है।
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