क्लृप्तैर्बहुभिरुपायैरभ्यासज्ञानभक्त्याद्यैः ।
पुंसो विना विरागं मुक्तेरधिकारिता न स्यात् ॥
सम्पादन किये हुए अभ्यास, ज्ञान और भक्ति आदि नाना उपायों से भी बिना वैराग्य के मनुष्य को मुक्ति का अधिकार नहीं होता।
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