मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
प्रबोधसुधाकर • अध्याय 1 • श्लोक 3
यद्यप्येवं विदितं तथापि परिभाषितो भवेदेव । अध्यात्मशास्त्रसारैर्हरिचिन्तनकीर्तनाभ्यासैः ॥
यद्यपि भगवान्‌ ऐसे हैं तथापि आध्यात्मिक शास्त्रों के सारों से तथा हरि-चिन्तन और कीर्तनाभ्यासादि से उनका कथन किया ही जाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
प्रबोधसुधाकर के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

प्रबोधसुधाकर के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें