क्वात्मा सच्चिद्रूपः क्व मांसरुधिरास्थिनिर्मितो देहः ।
इति यो लज्जति धीमानितरशरीरं स किं मनुते ॥
कहाँ तो सत-चित-स्वरूप आत्मा और कहाँ अस्थि, मांस और रुधिर आदि का बना हुआ यह अति घृणित देह? ऐसा विचारकर जो बुद्धिमान् लज्जित होता है, वह दूसरों के देहों को क्या समझेगा? (उनसे अपना सम्बन्ध क्यों जोड़ेगा?)
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