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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 1 • श्लोक 27
एवंविधोऽतिमलिनो देहो यत्सत्तया चलति । तं विस्मृत्य परेशं वहत्यहंतामनित्येऽस्मिन् ॥
ऐसा महामलिन देह जिसकी सत्ता से चलता है उस परमेश्वर को भुलाकर इस अनित्य और अपवित्र देह में लोग 'अहँबुद्धि' करते हैं।
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