यो देहः सुप्तोऽभूत्सुपुष्पशय्योपशोभिते तल्पे ।
सम्प्रति स रज्जुकाष्ठैर्नियन्त्रितः क्षिप्यते वह्नौ ॥
देखो, जो शरीर अति सुशोभित फूलों की सेज पर सुखपूर्वक सोया हुआ था वह अब रस्सी और काठ से जकड़ा जाकर अग्नि में फ़ैंका जा रहा है।
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