मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
प्रबोधसुधाकर • अध्याय 1 • श्लोक 21
पथि पतितमस्थि दृष्ट्वा स्पर्शभयादन्यमार्गतो याति । नो पश्यति निजदेहं चास्थिसहस्रावृतं परितः ॥
मार्ग में पड़ी हुई हड्डी को देखकर वह उससे छू जाने के डर से दुसरे मार्ग से निकल जाता है, परन्तु सब ओर हजारों हृड्डियो से भरे हुए अपने शरीर कों नहीं देखता।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
प्रबोधसुधाकर के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

प्रबोधसुधाकर के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें