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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 1 • श्लोक 2
यं वर्णयितुं साक्षाच्छृतिरपि मूकेव मौनमाचरति । सोऽस्माकं मनुजानां किं वाचां गोचरो भवति ॥
जिनका साक्षात्‌ (विधि-मुख से) वर्णन करने में श्रुति भी मूक के समान मौन हो जाती हैं, वे (भगवान्‌) क्‍या हम मनुष्यों की वाणी के विषय हो सकते हैं।
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