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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 1 • श्लोक 19
रुधिरत्रिधातुमज्जामेदोमांसास्थिसंहतिर्देहः । स बहिस्त्वचा पिनद्धस्तस्मान्नो भक्ष्यते काकैः ॥
यह शरीर रुधिर, त्रिधातु (वात, पित्त, कफ), मज्जा, मेद, मांस और हृड्डियों का समूह है; बाहर से यह त्वचा से मँदा हुआ है इसलिये इसे कोए भी नहीं खाते।
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