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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 1 • श्लोक 17
नरदेहातिक्रमणात्प्राप्तौ पश्वादिदेहानाम् । स्वतनोरप्यज्ञाने परमार्थस्यात्र का वार्ता ॥
नर-देह के नष्ट हो जाने पर यदि पशु आदि की योनि मिली तो उसमें तो भलिभांती अपने शरीर की भी सुधि नहीं रहती, परमार्थ की तो बात ही क्‍या है?
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