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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 1 • श्लोक 15
आत्मानात्मविवेको नो देहस्य च विनाशिताज्ञानम् । एवं सति स्वमायुः प्राज्ञैरपि नीयते मिथ्या ॥
जिनको आत्मा और अनात्मा का विवेक तथा देह की विनाशशीलता का ज्ञान नहीं हुआ वे भले ही बड़े बुद्धिमान्‌ हों, ऐसी स्थिति में उनकी आयु व्यर्थ ही जाती है।
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