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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 1 • श्लोक 12
आधिव्याधिवियोगात्मीयविपत्कलहदीर्घदारिद्रैः । जन्मान्तरमपि यः क्लेशः किं शक्यते वक्तुम् ॥
जन्म के अनन्तर भी आधि, व्याधि, वियोग, सवजनो की विपत्ति, कलह और बहुत समय तक रहने वाली दरिद्रता आदि से जितना दुःख उठाना पड़ता हैं क्‍या उसका वर्णन किया जा सकता है।
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