मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
प्रबोधसुधाकर • अध्याय 1 • श्लोक 11
अथवा यन्त्रच्छिद्राद्यद तु निःसार्यते प्रबलैः । प्रसवसमीरैश्च तदा यः क्लेशः सोऽप्यनिर्वाच्यः ॥
अथवा यदि ठीक-ठीक प्रसव भी हुआ तो जिस समय वह प्रबल प्रसूतिवायु के द्वारा संकुृचित योनिछिद्र से बाहर निकाला जाता हैं उस समय का कलेश भी अकथनीय होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
प्रबोधसुधाकर के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

प्रबोधसुधाकर के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें