अथवा यदि ठीक-ठीक प्रसव भी हुआ तो जिस समय वह प्रबल प्रसूतिवायु के द्वारा संकुृचित योनिछिद्र से बाहर निकाला जाता हैं उस समय का कलेश भी अकथनीय होता है।
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