राजा सेनजित्के पुत्र की मृत्यु हो गयी थी। वे उसी के शोक की आग से जल रहे थे। उनका मन विषाद में डूबा हुआ था। उन शोकविह्वल नरेश को देखकर ब्राह्मण ने इस प्रकार कहा-
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