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पिंगलागीता • अध्याय 1 • श्लोक 8
अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम् । यथा सेनजितं विप्रः कश्चिदेत्याब्रवीत् सुहृत् ॥
इस विषय में किसी हितैषी ब्राह्मण ने राजा सेनजित्‌ के पास आकर उन्हें जैसा उपदेश दिया था, उसी प्राचीन इतिहास को विज्ञ पुरुष दृष्टयन्त के रूप में प्रस्तुत किया करते हैं।
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