वास्तव में जिसे किसी प्रकार की आशा नहीं है, वही सुख से सोता है। आशा का न होना ही परम सुख है। देखो, आशा को निराशा के रूप में परिणत करके पिंगला सुख की नींद सोने लगी।
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