मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
पिंगलागीता • अध्याय 1 • श्लोक 6
युधिष्ठिर उवाच नष्टे धने वा दारे वा पुत्रे पितरि वा मृते । यया बुद्धया नुदेच्छोकं तन्मे ब्रूहि पितामह ॥
युधिष्ठिर ने पूछा - दादाजी! धन के नष्ट हो जाने पर अथवा स्त्री, पुत्र या पिता के मर जाने पर किस बुद्धि से मनुष्य अपने शोक का निवारण करे? यह मुझे बताइये।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
पिंगलागीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

पिंगलागीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें