युधिष्ठिर उवाच
नष्टे धने वा दारे वा पुत्रे पितरि वा मृते ।
यया बुद्धया नुदेच्छोकं तन्मे ब्रूहि पितामह ॥
युधिष्ठिर ने पूछा - दादाजी! धन के नष्ट हो जाने पर अथवा स्त्री, पुत्र या पिता के मर जाने पर किस बुद्धि से मनुष्य अपने शोक का निवारण करे? यह मुझे बताइये।
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