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पिंगलागीता • अध्याय 1 • श्लोक 57
संकेते पिङ्गला वेश्या कान्तेनासीद् विनाकृता। अथ कृच्छ्रगता शान्ता बुद्विमास्थापयत् तदा ॥
एक बार पिंगला वेश्या बहुत देर तक संकेत-स्थान पर बैठी रही, तब भी उसका प्रियतम उसके पास नहीं आया; इससे वह बड़े कष्ट में पड़ गयी तथापि शान्त रहकर इस प्रकार विचार करने लगी।
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