हृदय से उत्पन्न होने वाला यह काम हृदय में ही पुष्ट होता है, फिर यही मृत्यु का रूप धारण कर लेता है; क्योंकि (जब इसकी सिद्धि में कोई बाधा आती है, तब) विद्वानों द्वारा यही प्राणियों के शरीर के भीतर क्रोध के नाम से पुकारा जाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
पिंगलागीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
पिंगलागीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।