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पिंगलागीता • अध्याय 1 • श्लोक 5
एवं व्यवसिते लोके बहुदोषे युधिष्ठिर। आत्ममोक्षनिमित्तं वै यतेत मतिमान् नरः ॥
युधिष्ठिर! इस प्रकार यह जगत् अनेक दोषों से परिपूर्ण है, ऐसा निश्चय करके बुद्धिमान् पुरुष अपने मोक्ष के लिये प्रयत्न करे।
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