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पिंगलागीता • अध्याय 1 • श्लोक 49
एतां बुद्धिं समास्थाय सुखमास्ते गुणान्वितः । सर्वान् कामान् जुगुप्सेत कामान् कुर्वीत पृष्ठतः ॥
ऐसी बुद्धि का आश्रय लेकर कामनाओं के त्यागरूपी गुण से युक्त हुआ मनुष्य सुख से रहता है; इसलिये सब प्रकार के भोगों से विरक्त होकर उन्हें पीठ-पीछे कर दे अर्थात् उनसे विमुख हो जाय।
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