संसार में जो कुछ इस लोक के भोगों का सुख है और जो स्वर्ग का महान् सुख है, वे दोनों तृष्णाक्षय से होने वाले सुख की सोलहवीं कला के बराबर भी नहीं हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
पिंगलागीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
पिंगलागीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।