आरम्भ में आलस्य सुख-सा जान पड़ता है, परंतु वह अन्त में दुःखदायी होता है और कार्यकौशल दुःख-सा लगता है, परंतु वह सुख का उत्पादक है। कार्यकुशल पुरुष में ही लक्ष्मीसहित ऐश्वर्य निवास करता है, आलसी में नहीं।
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