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पिंगलागीता • अध्याय 1 • श्लोक 37
नित्यं प्रमुदिता मूढा दिवि देवगणा इव। अवलेमेन महता परिभूत्या विचेतसः ॥
मूर्ख मनुष्य स्वर्ग में देवताओं की भाँति सदा विषयसुख में मग्न रहते हैं; क्योंकि उनका चित्त विषयासक्ति के कीचड़ में लथपथ होकर मोहित हो जाता है।
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