न बुद्धिर्धनलाभाय न जाड्यमसमृद्धये ।
लोकपर्यायवृत्तान्तं प्राज्ञो जानाति नेतरः ॥
न तो बुद्धि धन की प्राप्ति में कारण है, न मूर्खता निर्धनता में, वास्तव में संसार चक्र की गति का वृत्तान्त कोई ज्ञानी पुरुष ही जान पाता है, दूसरा नहीं।
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