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पिंगलागीता • अध्याय 1 • श्लोक 29
नालं सुखाय सुहृदो नालं दुःखाय शत्रवः । न च प्रज्ञालमर्थानां न सुखानामलं धनम् ॥
अन्यथा न तो सुहृद् सुख देने में समर्थ हैं, न शत्रु दुःख देने में समर्थ हैं, न तो बुद्धि धन देने की शक्ति रखती है और न धन ही सुख देने में समर्थ होता है।
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