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पिंगलागीता • अध्याय 1 • श्लोक 27
पुत्रनाशे वित्तनाशे ज्ञातिसम्बन्धिनामपि । प्राप्यते सुमहद् दुःखं दावाग्निप्रतिमं विभो। दैवायत्तमिदं सर्वं सुखदुःखे भवाभवौ ॥
प्रभो! यहाँ सब लोगों को पुत्र, धन, कुटुम्बी तथा सम्बन्धियों का नाश होने पर दावानल के समान दाह उत्पन्न करने वाला महान् दुःख प्राप्त होता है; परंतु सुख-दुःख और जन्म-मृत्यु आदि यह सब कुछ प्रारब्ध के ही, अधीन है।
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