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पिंगलागीता • अध्याय 1 • श्लोक 26
पुत्रदारकुटुम्बेषु प्रसक्ताः सर्वमानवाः । शोकपङ्कार्णवे मग्ना जीर्णा वनगजा इव ॥
स्त्री, पुत्र और कुटुम्ब में आसक्त हुए सभी मनुष्य उसी प्रकार शोक के समुद्र में डूब जाते हैं, जैसे बूढ़े जंगली हाथी दलदल में फँसकर नष्ट हो जाते हैं।
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