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पिंगलागीता • अध्याय 1 • श्लोक 24
स्नेहेन तिलवत् सर्वं सर्गचक्रे निपीड्यते। तिलपीडैरिवाक्रम्य क्लेशैरज्ञानसम्भवैः ॥
तेलीलोग तेल के लिये जैसे तिलों को कोल्हू में पेरते हैं, उसी प्रकार स्नेह के कारण सब लोग अज्ञानजनित क्लेशों द्वारा सृष्टिचक्र में पिस रहे हैं।
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