मनुष्य नाना प्रकार के स्नेह-बन्धनों में बँधे हुए हैं, अतः वे सदा विषयों की आसक्ति से घिरे रहते हैं; इसीलिये जैसे बालू द्वारा बनाये हुए पुल जल के वेग से बह जाते हैं, उसी प्रकार उन मनुष्यों की विषयकामना सफल नहीं होती; जिससे वे दुःख पाते रहते हैं।
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