जीवितं च शरीरेण जात्यैव सह जायते ।
उभे सह विवर्तेते उभे सह विनश्यतः ॥
यह जीवन स्वभावतः शरीर के साथ ही उत्पन्न होता है। दोनों साथ-साथ विविध रूपों में रहते हैं और साथ-ही-साथ नष्ट हो जाते हैं।
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