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पिंगलागीता • अध्याय 1 • श्लोक 21
शरीरमेवायतनं सुखस्य दुःखस्य चाप्यायतनै शरीरम्। यद्यच्छरीरेण करोति कर्म तेनैव देही समुपाश्नुते तत् ॥
यह शरीर ही सुख का आधार है और यही दुःख का भी आधार है। देहाभिमानी पुरुष शरीर से जो-जो कर्म करता है, उसी के अनुसार वह सुख एवं दुःखरूप फल भोगता है।
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