भीष्म उवाच
सर्वत्र विहितो धर्मः स्वर्ग्यः सत्यफलं तपः ।
बहुद्वारस्य धर्मस्य नेहास्ति विफला क्रिया ॥
भीष्मजी बोले - युधिष्ठिर! वेदों में सर्वत्र सभी आश्रमों के लिये स्वर्गसाधक यथार्थ फल की प्राप्ति कराने वाली तपस्या का उल्लेख है। धर्म के बहुत-से द्वार हैं। संसार में कोई ऐसी क्रिया नहीं है, जिसका कोई फल न हो।
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