अदर्शनादापतितः पुनश्चादर्शनं गतः ।
न त्वासौ वेद न त्वं तं कः सन् किमनुशोचसि ॥
तुम्हारा पुत्र किसी अज्ञात स्थिति से आया था और अब अज्ञात स्थिति में ही चला, गया है। न तो वह तुम्हें जानता था और न तुम उसे जानते थे; फिर तुम उसके कौन होकर किसलिये शोक करते हो?
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