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पिंगलागीता • अध्याय 1 • श्लोक 15
यथा काष्ठं च काष्ठं च समेयातां महोदधौ। समेत्य च व्यपेयातां तद्वद्भूतसमागमः ॥
जिस प्रकार समुद्र में बहते हुए दो काष्ठ कभी-कभी एक-दूसरे से मिल जाते हैं और मिलकर फिर अलग हो जाते हैं, उसी प्रकार इस लोक में प्राणियों का समागम होता है।
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