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पिंगलागीता • अध्याय 1 • श्लोक 13
ब्राह्मण उवाच 0 पश्य भूतानि दुःखेन व्यतिषिक्तानि सर्वशः । उत्तमाधममध्यानि तेषु तेष्विह कर्मसु ॥
ब्राह्मण ने कहा - राजन्! देखो, इस संसार में उत्तम, मध्यम और अधम सभी प्राणी भिन्न-भिन्न कर्मों में आसक्त हो दुःख से ग्रस्त हो रहे हैं।
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