मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
पिंगलागीता • अध्याय 1 • श्लोक 10
किं नु मुह्यसि मूढस्त्वं शोच्यः किमनुशोचसि । यदा त्वामपि शोचन्तः शोच्या यास्यन्ति तां गतिम् ॥
राजन्! तुम मूढ़ मनुष्य की भाँति क्यों मोहित हो रहे हो? शोक के योग्य तो तुम स्वयं ही हो, फिर दूसरों के लिये क्यों शोक करते हो? अजी! एक दिन ऐसा आयेगा, जब कि दूसरे शोचनीय मनुष्य तुम्हारे लिये भी शोक करते हुए उसी गति को प्राप्त होंगे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
पिंगलागीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

पिंगलागीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें