राजन्! तुम मूढ़ मनुष्य की भाँति क्यों मोहित हो रहे हो? शोक के योग्य तो तुम स्वयं ही हो, फिर दूसरों के लिये क्यों शोक करते हो? अजी! एक दिन ऐसा आयेगा, जब कि दूसरे शोचनीय मनुष्य तुम्हारे लिये भी शोक करते हुए उसी गति को प्राप्त होंगे।
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